Shiv Sharanagati Stotra: संसार से हारकर शिव की शरण में(Lyrics & Meaning)

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सूर्योदय के समय एक प्राचीन हिंदू मंदिर के प्रांगण में भगवान शिव की विशाल ध्यानमग्न प्रतिमा। सूर्य की किरणें और सुबह का कोहरा मंदिर में फैला है, भक्त और पुजारी पूजा कर रहे हैं और दीये जला रहे हैं।
Visual by Gemini

Shiv Sharanagati Stotra With Lyrics And Hindi Meaning-HD

ज़िंदगी में कई बार ऐसा मोड़ आता है जब हमें लगता है कि हमारे चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ अँधेरा है। न कोई अपना सगा दिखाई देता है, न कोई ऐसा दोस्त जो हमारे मन की पीड़ा को समझ सके। मैंने अपनी ज़िंदगी में ऐसे कई पल देखे हैं जब मैं अंदर से पूरी तरह टूट गया था और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं अपनी परेशानियां किससे कहूँ। जब दुनिया की सारी उम्मीदें खत्म हो जाती हैं, तब एक इंसान कहाँ जाए?

ऐसे ही एक मुश्किल समय में, जब मेरे पास कैलाशपति महादेव के सामने रोने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा था, तब मुझे इस अत्यंत भावपूर्ण 'शिव शरणागति स्तोत्र' का सहारा मिला।

यह कोई साधारण प्रार्थना या श्लोक नहीं है दोस्तों। यह एक ऐसे भक्त की चीख और पुकार है, जो इस स्वार्थी संसार से पूरी तरह हारकर, थककर अपने भोलेनाथ के चरणों में गिर पड़ा है। जब आप नीचे दिए गए इस स्तोत्र का अर्थ पढ़ेंगे, तो आपको लगेगा कि जैसे ये शब्द किसी और के नहीं, बल्कि आपके ही दिल से निकल रहे हैं।

मैंने यहाँ इस स्तोत्र का बहुत ही मधुर और शांति देने वाला HD Audio और उसका सरल हिंदी अर्थ दिया है। मेरी आपसे बस एक विनती है—अगर आप आज बहुत उदास या तनाव में हैं, तो एक शांत जगह बैठें, आँखें बंद करें, इस ऑडियो को प्ले करें और बस महादेव की शरण में चले जाएं। आपका सारा बोझ वे खुद उठा लेंगे।

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शिव शरणागति स्तोत्र (HD Audio) Male Version Swaranjal Originals • Devotional
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शिव शरणागति स्तोत्र (HD Audio) Female Version Swaranjal Originals • Devotional
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🌸 शिव शरणागति स्तोत्र (Female Version Video)

Shiv Sharanagati Stotra Female Version Video
संसारे पराजितोऽहं, शून्यमस्ति मे जीवनम्।
आशापाशैः बद्धोऽहं, क्लांतोऽस्मि हे महेश्वरम्।
त्वमेव गतिर्मम शम्भो, तव शरणं प्रपद्ये ॥
अर्थ: मैं इस संसार से हार गया हूँ, मेरा जीवन पूरी तरह सूना हो गया है। मैं व्यर्थ की आशाओं के जाल में बंधा हुआ हूँ और हे महेश्वर! मैं अब बहुत थक गया हूँ। हे शम्भो! अब केवल आप ही मेरा एकमात्र सहारा हैं, मैं आपकी शरण में आता हूँ।
न मित्रं न च बन्धुर्मे, न कश्चित् दुःखभाजकम्।
यत्र पश्यामि तत्रैव, छलपूर्णं च मानसम्।
त्राहि मां करुणासिन्धो, तव चरणौ भजाम्यहम् ॥
अर्थ: इस दुनिया में न मेरा कोई सच्चा मित्र है और न ही कोई अपना बंधु, जो मेरा दुःख बांट सके। मैं जहाँ भी देखता हूँ, मुझे छल-कपट से भरे हुए लोग ही दिखाई देते हैं। हे करुणा के सागर! मेरी रक्षा कीजिए, मैं आपके चरणों की वंदना करता हूँ।

🌸 शिव शरणागति स्तोत्र (Male Version Video)

Sharanagati Shiva Stotram Male Video
अन्धकारे भ्रमामि च, मार्गं नैव प्रपश्यामि।
लोभ-मोह-भयैः ग्रस्तं, चित्तं मे न स्थिरं क्वचित्।
त्वं ज्योति स्वरूपोऽसि, आलोकय मम अन्तरम् ॥
अर्थ: मैं घने अंधेरे में भटक रहा हूँ और मुझे बाहर निकलने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा। मेरा मन लोभ, मोह और डर से जकड़ा हुआ है और एक पल को भी शांत नहीं है। हे प्रभु! आप ही ज्योति (प्रकाश) स्वरूप हैं, कृपया मेरे मन के भीतर उजाला कर दीजिए।
न जानामि योगं न च ध्यानं, न पूजां न च मन्त्रकम्।
न शास्त्रं न च पाण्डित्यं, केवलं दुःखं च वेदनम्।
भोलेनाथ दयालुस्त्वं, पालय मां जगदीश्वर ॥
अर्थ: मैं न कोई योग जानता हूँ, न ध्यान, न पूजा करना जानता हूँ और न ही कोई मंत्र। मुझे न शास्त्रों का ज्ञान है और न ही मुझमें कोई विद्वता है; मेरे पास तो बस दुःख और पीड़ा है। हे भोलेनाथ! आप बहुत दयालु हैं, हे जगदीश्वर! मेरी रक्षा कीजिए।
कपालिनं त्रिशूलिनं, भस्माङ्गं नीलकण्ठकम्।
गङ्गाधरं वृषारूढं, कालकालं भयंकरम्।
नमस्तेऽस्तु महादेव, पाहि मां शरणागतम् ॥
अर्थ: जिनके हाथ में कपाल और त्रिशूल है, जिनके अंगों पर भस्म रमी है और जिनका कंठ नीला है। जो गंगा को धारण करते हैं, नंदी (बैल) पर सवारी करते हैं, जो कालों के भी काल और भयंकर स्वरूप वाले हैं। ऐसे महादेव को मेरा नमस्कार है, मैं आपकी शरण में आया हूँ, मेरी रक्षा करें।
पापोऽहं पापकर्माऽहं, पापात्मा पापसम्भवः।
पुनीहि मां महादेव, तव भक्तोऽस्मि दीनधीः।
करुणामय महेशान, तव शरणं प्रपद्ये ॥
अर्थ: मैं पापी हूँ, मेरे कर्म पापपूर्ण हैं, मेरी आत्मा पापी है और मेरा जन्म भी पाप से ही हुआ है। हे महादेव! मुझे इस दलदल से निकालकर पवित्र कीजिए, मैं अत्यंत दीन (बेबस) बुद्धि वाला आपका भक्त हूँ। हे करुणामय महेशान! मैं आपकी शरण में आता हूँ।
मनो मे शान्ततां याति, तव नामं जपन् मुहुः।
कैलासवासी विश्वेश, दुःखौघं हर मे प्रभो।
त्वमेव माता च पिता, त्वमेव सर्वस्वं मम ॥
अर्थ: केवल आपका नाम बार-बार जपने से ही मेरे बेचैन मन को शांति मिलती है। हे कैलाश पर वास करने वाले विश्वनाथ! मेरे दुःखों के पहाड़ को नष्ट कर दीजिए। आप ही मेरे माता-पिता हैं और आप ही मेरा सब कुछ हैं।
शिव शरणं, शिव शरणं, मम शिव शरणं।
महादेव शरणं, महादेव शरणं, मम महादेव शरणं।
तव शरणं, तव शरणं, तव शरणं प्रपद्ये ॥
अर्थ: मैं शिव की शरण में हूँ, शिव की शरण में हूँ... महादेव की शरण में हूँ। हे प्रभु, मैं पूरी तरह से आपकी शरण में आता हूँ।
महादेव आप सभी के जीवन के दुःख दूर करें। हर हर महादेव! 🙏 

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