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Daridrya Dahan Shiv Stotra With Lyrics And Hindi Meaning-HD
क्या आप लगातार आर्थिक समस्याओं, कर्ज या जीवन की दरिद्रता से परेशान हैं? कई बार कड़ी मेहनत करने के बावजूद हमें वह फल नहीं मिलता
जिसके हम हकदार होते हैं। घर में धन रुकता नहीं है, और परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ता है। ऐसे समय में जब सारे दरवाजे बंद नज़र आएं, तब महर्षि वशिष्ठ द्वारा रचित
'दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र' सबसे अचूक और शक्तिशाली उपाय माना गया है।
जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है— 'दारिद्र्य दहन' यानी दरिद्रता (गरीबी और दुखों) को भस्म कर देने वाला स्तोत्र। जो भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ महादेव के इस स्तोत्र का पाठ करता है या इसे सुनता है, भगवान शिव उसके जीवन से धन के अभाव, कर्ज और हर तरह के कष्टों को जड़ से खत्म कर देते हैं।
स्वरांजल (Swaranjal) पर हम आपके लिए इस अत्यंत सिद्ध स्तोत्र का शुद्ध उच्चारण और शांति देने वाला HD Audio लेकर आए हैं। आप नीचे दिए गए प्लेयर से इसे सुन सकते हैं और इसका सरल हिंदी अर्थ समझकर महादेव की भक्ति में लीन हो सकते हैं। आप चाहें तो रोज़ाना पाठ करने के लिए इसका PDF और Audio भी मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।
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दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र (HD Audio)
Swaranjal Originals • Devotional
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विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय
कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय ।
कर्पूरकान्ति धवलाय जटाधराय
दारिद्र्य दुःख दहनाय नमः शिवाय ॥१॥
अर्थ: जो पूरे विश्व के स्वामी हैं, नरक रूपी संसार सागर से पार लगाने वाले हैं, जिनके नाम का श्रवण कानों के लिए अमृत के समान है, जो मस्तक पर चंद्रमा धारण करते हैं, जिनकी कांति कपूर के समान उज्ज्वल है, उन जटाधारी, दरिद्रता और दुखों को भस्म करने वाले भगवान शिव को मेरा नमस्कार है।
गौरीप्रियाय रजनीश कलाधराय
कालान्तकाय भुजगाधिप कङ्कणाय ।
गङ्गाधराय गजराज विमर्दनाय
दारिद्र्य दुःख दहनाय नमः शिवाय ॥२॥
अर्थ: जो माता गौरी के अत्यंत प्रिय हैं, चंद्रमा की कलाओं को धारण करने वाले हैं, काल के भी काल (यमराज का भी अंत करने वाले) हैं, नागराज वासुकि का कंगन पहनने वाले हैं, जटाओं में गंगा को धारण करने वाले हैं और गजासुर का वध करने वाले हैं, उन दरिद्रता और दुखों को भस्म करने वाले शिव को मेरा नमस्कार है।
भक्तिप्रियाय भवरोग भयापहाय
उग्राय दुर्ग भवसागर तारणाय ।
ज्योतिर्मयाय गुणनाम सुनृत्यकाय
दारिद्र्य दुःख दहनाय नमः शिवाय ॥३॥
अर्थ: जो अपने भक्तों की भक्ति से प्रसन्न होते हैं, जन्म-मृत्यु रूपी सांसारिक रोगों और भय को दूर करने वाले हैं, जो उग्र रूप वाले हैं, इस दुर्गम भवसागर से पार उतारने वाले हैं, जो प्रकाश से पूर्ण (ज्योतिर्मय) हैं और जिनके गुणों और नाम पर सुंदर नृत्य होता है, उन दरिद्रता और दुखों को भस्म करने वाले शिव को मेरा नमस्कार है।
चर्माम्बराय शवभस्म विलेपनाय
भालेक्षणाय मणिकुण्डल मण्डिताय ।
मञ्जीर पादयुगलाय जटाधराय
दारिद्र्य दुःख दहनाय नमः शिवाय ॥४॥
अर्थ: जो बाघ की खाल पहनते हैं, शरीर पर चिता की भस्म लगाते हैं, जिनके मस्तक पर तीसरा नेत्र है, जो मणियों के कुंडल से सुशोभित हैं, जिनके दोनों चरणों में नूपुर (पायल) बज रहे हैं, उन जटाधारी, दरिद्रता और दुखों को भस्म करने वाले शिव को मेरा नमस्कार है।
पञ्चाननाय फणिराज विभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रय मण्डिताय ।
आनन्दभूमि वरदाय तमोमयाय
दारिद्र्य दुःख दहनाय नमः शिवाय ॥५॥
अर्थ: जिनके पांच मुख हैं, जो नागराज के आभूषण पहनते हैं, जो स्वर्ण के समान वस्त्र धारण करने वाले हैं, तीनों लोकों को सुशोभित करने वाले हैं, आनंदमयी भूमि का वरदान देने वाले हैं और अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाले हैं, उन दरिद्रता और दुखों को भस्म करने वाले शिव को मेरा नमस्कार है।
भानुप्रियाय भवसागर तारणाय
कालान्तकाय कमलासन पूजिताय ।
नेत्रत्रयाय शुभलक्षण लक्षिताय
दारिद्र्य दुःख दहनाय नमः शिवाय ॥६॥
अर्थ: जो सूर्य को प्रिय हैं, भवसागर से पार उतारने वाले हैं, काल का भी अंत करने वाले हैं, कमल पर आसीन ब्रह्मा जी द्वारा पूजे जाने वाले हैं, जिनके तीन नेत्र हैं और जो शुभ लक्षणों से युक्त हैं, उन दरिद्रता और दुखों को भस्म करने वाले शिव को मेरा नमस्कार है।
रामप्रियाय रघुनाथ वरप्रदाय
नागप्रियाय नरकार्णव तारणाय ।
पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय
दारिद्र्य दुःख दहनाय नमः शिवाय ॥७॥
अर्थ: जो भगवान श्री राम के अत्यंत प्रिय हैं, रघुनाथ जी को वरदान देने वाले हैं, जिन्हें नाग प्रिय हैं, नरक रूपी सागर से उबारने वाले हैं, जो पुण्यों में भी सबसे परम पुण्य रूप हैं और देवताओं द्वारा पूजित हैं, उन दरिद्रता और दुखों को भस्म करने वाले शिव को मेरा नमस्कार है।
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गीतप्रियाय वृषभेश्वर वाहनाय ।
मातङ्गचर्म वसनाय महेश्वराय
दारिद्र्य दुःख दहनाय नमः शिवाय ॥८॥
अर्थ: जो मोक्ष (मुक्ति) के स्वामी हैं, शुभ फल देने वाले हैं, शिवगणों के ईश्वर हैं, जिन्हें संगीत और गान प्रिय है, जो नंदी (वृषभ) पर सवारी करते हैं, हाथी की खाल पहनने वाले हैं, उन महेश्वर, दरिद्रता और दुखों को भस्म करने वाले शिव को मेरा नमस्कार है।
वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोग निवारणम् ।
सर्वसम्पत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादि वर्धनम् ।
त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात् ॥९॥ (फलश्रुति)
पाठ का फल (फलश्रुति): महर्षि वशिष्ठ द्वारा रचित यह स्तोत्र सभी रोगों को नष्ट करने वाला, सभी प्रकार की संपत्ति प्रदान करने वाला और शीघ्र ही पुत्र-पौत्र आदि की वृद्धि करने वाला है। जो व्यक्ति तीनों संध्याओं (सुबह, दोपहर, शाम) में इसका नियमित पाठ करता है, वह निश्चित रूप से स्वर्ग (परम सुख) को प्राप्त करता है।
महादेव आपके जीवन से दरिद्रता का नाश करें और सुख-समृद्धि दें। हर हर महादेव! 🙏
------------------यह भी पढ़ें:👉 धैर्य का फल------------------
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र की रचना किसने की थी? (Who wrote Daridrya Dahan Shiva Stotram?)
इस अत्यंत शक्तिशाली शिव स्तोत्र की रचना परम ज्ञानी महर्षि वशिष्ठ जी ने की थी। उन्होंने इसे संसार के लोगों को आर्थिक दुखों और दरिद्रता से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से रचा था।
Q2. दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्र का पाठ करने के क्या लाभ हैं? (Benefits of chanting this Stotram?)
जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, इस स्तोत्र का मुख्य लाभ 'दरिद्रता का दहन' (गरीबी का नाश) करना है। इसके नियमित पाठ से कर्ज से मुक्ति मिलती है, रुके हुए धन की प्राप्ति होती है, व्यापार में वृद्धि होती है और घर में सुख-शांति व समृद्धि का वास होता है।
Q3. इस स्तोत्र का पाठ करने का सबसे सही समय क्या है? (Best time to chant Daridrya Dahan Stotram?)
स्तोत्र की फलश्रुति के अनुसार, इसका पाठ 'त्रिसन्ध्यं' यानी दिन के तीनों प्रहर (सुबह, दोपहर और शाम) में करना सबसे उत्तम माना गया है। यदि यह संभव न আসতে हो, तो सुबह स्नान के बाद या शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव के समक्ष इसका पाठ अवश्य करना चाहिए।
Q4. क्या महिलाएं इस स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं? (Can women chant Daridrya Dahan Shiva Stotram?)
हाँ, बिल्कुल! भगवान शिव अत्यंत दयालु हैं और उनकी भक्ति पर सभी का समान अधिकार है। महिलाएं भी पूरी श्रद्धा, पवित्रता और साफ मन से इस स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं या इसका ऑडियो सुन सकती हैं।
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